विवाहिता की संदिग्ध मौत पर बड़ा सवाल: आखिर शिकायत के बाद भी मुकदमा दर्ज क्यों नहीं?
ब्यूरो रिपोर्ट शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश

विवाहिता की संदिग्ध मौत पर बड़ा सवाल: आखिर शिकायत के बाद भी मुकदमा दर्ज क्यों नहीं?
खुटार पुलिस की कार्यप्रणाली पर मायके पक्ष ने उठाए सवाल | पति समेत ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप | निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
SvasJsNews | जनहित की आवाज़, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश सरकार जहां सुशासन, महिला सुरक्षा और नारी सम्मान को अपनी प्राथमिकताओं में गिनाती है, वहीं शाहजहांपुर जनपद के खुटार थाना क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत सामान्य घटना नहीं, बल्कि इसके पीछे गंभीर परिस्थितियां हो सकती हैं। परिजन पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों पर हत्या कर शव फंदे से लटकाने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि परिजन गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो उनकी शिकायत पर अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की गई? परिजनों के अनुसार, घटना के बाद से वे न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और शिकायत की वर्तमान स्थिति सामने आना आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, लखीमपुर खीरी जिले के ढोंगवा, पोस्ट बक्खारी गांव निवासी प्रीती सिंह का विवाह शाहजहांपुर जिले के खुटार थाना क्षेत्र के कुईयां डीह गांव निवासी विपिन सिंह, पुत्र महेंद्र सिंह, के साथ हुआ था।बताया गया है कि गुरुवार सुबह प्रीती का शव ससुराल स्थित कमरे में पंखे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। लेकिन घटना के बाद कई ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब जांच के माध्यम से मिलना जरूरी है। मायके पक्ष ने पति पर शराब के नशे में मारपीट करने और प्रीती को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि उन्हें घटना की सूचना समय पर नहीं दी गई। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
घटनास्थल की तस्वीरों को लेकर भी उठ रहे सवाल
घटनास्थल की बताई जा रही तस्वीर को लेकर भी परिजनों और लोगों के मन में संदेह पैदा होने की बात कही जा रही है। तस्वीर में शव की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, केवल तस्वीर के आधार पर हत्या या आत्महत्या का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह जांच का विषय है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और घटनास्थल पर मिले साक्ष्य क्या संकेत देते हैं। ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल का निरीक्षण, फॉरेंसिक साक्ष्य, संबंधित लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है।
मुकदमा दर्ज करने को लेकर परिजनों की शिकायत
मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि वे लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिल रहा। परिजनों की ओर से थाना प्रभारी के कथित जवाब को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है। यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी बात समझना जरूरी है: मुकदमा किस धारा में दर्ज होगा, इसका अंतिम निर्धारण जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होता है; लेकिन संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी होती है। यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध का आरोप सामने आता है, तो उसकी अनदेखी किए जाने के बजाय नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज करने अथवा लागू कानूनी प्रक्रिया अपनाने का सवाल उठता है। यदि परिजनों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई है, तो सक्षम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को मामले की समीक्षा कराकर नियमानुसार उचित कदम उठाना चाहिए।
सिर्फ पंचायतनामा और पोस्टमार्टम से खत्म नहीं होती जांच की जरूरत
शव का पंचायतनामा भरना और पोस्टमार्टम कराना आवश्यक प्रक्रियाएं हो सकती हैं, लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के प्रत्येक पहलू की जांच का महत्व अपनी जगह बना रहता है। यह पता लगाना आवश्यक है कि मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, घटनास्थल पर क्या साक्ष्य मिले और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि किसी अपराध की आशंका जताई गई है, तो उसे केवल आरोप मानकर अनदेखा करना भी उचित नहीं होगा और बिना प्रमाण किसी को दोषी ठहराना भी सही नहीं है। कानून के तहत निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने लाने का रास्ता है।
नौ वर्षीय बेटे के सिर से उठा मां का साया
प्रीती की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। बताया जा रहा है कि उनका लगभग नौ वर्षीय बेटा मां के स्नेह से वंचित हो गया है। मायके पक्ष के लोग अपनी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुलिस प्रशासन से सीधे सवाल
1. क्या मृतका के मायके पक्ष की लिखित शिकायत प्राप्त हुई है? यदि हां, तो उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
2. यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध के आरोप हैं, तो प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में कानून के अनुसार क्या कदम उठाए गए?
3. क्या घटनास्थल से संबंधित साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है?
4. क्या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मामले की समीक्षा कर शिकायतकर्ता परिवार को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराएंगे?
5. क्या पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी?
अब वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही जरूरी
महिला सुरक्षा और कानून के राज का अर्थ केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि प्रत्येक शिकायत पर निष्पक्षता और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। यदि इस मामले में शिकायत के बावजूद नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई है, तो यह गंभीर विषय है और इसकी समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।
SvasJsNews की मांग है कि पुलिस अधीक्षक, शाहजहांपुर मामले का संज्ञान लेकर शिकायत की स्थिति स्पष्ट कराएं, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई करें। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—प्रीती की मौत की सच्चाई क्या है और उनके मायके पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है? इन सवालों का जवाब आधिकारिक पुलिस पक्ष, जांच के निष्कर्ष और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सामने आना चाहिए।
नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी एवं परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होना बाकी है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।




