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कुल्हाड़ी से हमले के प्रयास का आरोप,वीडियो प्रसारित,समझौते का दबाव बनाने का आरोप,दर्ज धाराओं पर भी असंतोष

ब्यूरो रिपोर्ट पीलीभीत

कुल्हाड़ी से हमले के प्रयास का आरोप, चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज; कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल

सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र में सामान बदलने को लेकर हुआ था विवाद, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित; शिकायतकर्ता ने समझौते का दबाव बनाने का लगाया आरोप, दर्ज धाराओं पर भी जताया असंतोष

पीलीभीत।

जनपद पीलीभीत के सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र में सामान बदलने को लेकर हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले में चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद करीब 36 घंटे तक समझौता कराने के प्रयास होते रहे। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह राजीनामा करने के बजाय कानूनी कार्रवाई चाहता था। इस बीच घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्रवाई में हुई देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।हालांकि, समझौते के प्रयासों, कथित दबाव और कार्रवाई में देरी के पीछे के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

समझौते के प्रयासों का आरोप, शिकायतकर्ता ने कार्रवाई पर दिया जोर

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, घटना के बाद थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की गई थी। आरोप है कि इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिशें होती रहीं। शिकायतकर्ता का दावा है कि 18 अक्टूबर 2026 की रात तक भी समझौते के प्रयास जारी थे, लेकिन वह अपनी शिकायत वापस लेने या राजीनामा करने के लिए तैयार नहीं हुआ।शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, इसी दौरान कथित तौर पर यह भी कहा गया कि कुल्हाड़ी केवल उठाई गई थी और उससे किसी को चोट नहीं लगी। इसके बाद अगले दिन थाने आने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके पास घटनाक्रम से संबंधित वीडियो मौजूद है और वह मामले में विधिक कार्रवाई चाहता है। इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक है। पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

19 अक्टूबर को फिर थाने पहुंचा शिकायतकर्ता पक्ष

बताया गया है कि 19 अक्टूबर को शिकायतकर्ता पक्ष दोबारा सेहरामऊ उत्तरी थाने पहुंचा। इस दौरान थाना परिसर में कई सामाजिक व्यक्तियों और एक संगठन से जुड़े लोगों के मौजूद रहने की चर्चा है। आरोप है कि वहां भी समझौता कराने के प्रयास किए गए। यह भी दावा किया गया कि मुकदमा दर्ज होने की स्थिति में दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की बात उठी। इसके बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता पक्ष की शिकायत पर चार व्यक्तियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। दूसरी ओर, संबंधित पक्ष की ओर से भी दुकान में लूटपाट समेत अन्य आरोप लगाते हुए प्रार्थनापत्र दिए जाने की जानकारी है। दूसरे पक्ष की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज हुई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। दोनों पक्षों के आरोपों का निस्तारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 17 अक्टूबर 2026 की शाम की बताई जा रही है। जनपद पीलीभीत के पूरनपुर विकासखंड अंतर्गत सुल्तानपुर निवासी अधिवक्ता मुन्ने बाबू का पुत्र एक यात्री को सेहरामऊ रेलवे स्टेशन पर छोड़ने आया था। वापसी के दौरान उसने स्टेशन के पीछे स्थित एक दुकान से कुछ सामान खरीदा। आरोप है कि सामान खराब होने की बात सामने आने पर युवक ने दुकानदार से उसे बदलने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो बाद में गाली-गलौज और मारपीट के विवाद में बदल गई। बताया गया है कि युवक ने फोन करके अपने परिजनों को मौके पर बुलाया। इसके बाद उसके पिता और पूर्व प्रधान का पुत्र भी वहां पहुंचे। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि इसी दौरान दुकानदार का भाई कुल्हाड़ी लेकर मौके पर मौजूद लोगों की ओर बढ़ा और हमला करने का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक व्यक्ति को कुल्हाड़ी उठाकर आगे बढ़ते हुए और आसपास मौजूद लोगों को उसे रोकने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, वीडियो के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियों, सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित हमले की मंशा का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इन पहलुओं की पुष्टि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों से ही हो सकेगी।

18 अक्टूबर को दी गई थी शिकायत, कार्रवाई में देरी पर सवाल

बताया गया है कि 18 अक्टूबर की सुबह शिकायतकर्ता पक्ष ने थाने में प्रार्थनापत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, दूसरे पक्ष ने भी दुकान में लूटपाट समेत अन्य आरोप लगाते हुए अपनी शिकायत दी। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि उसने घटना से संबंधित वीडियो भी प्रस्तुत किए थे।ऐसे में प्रमुख सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने किन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई? यदि शिकायत पर कार्रवाई में समय लगा, तो उसके कारण क्या थे? इन सवालों का स्पष्ट उत्तर पुलिस के आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध अभिलेखों से ही मिल सकेगा।

दर्ज धाराओं पर असंतोष, उच्चाधिकारियों से शिकायत की तैयारी

शिकायतकर्ता पक्ष ने मुकदमे में दर्ज धाराओं को लेकर भी असंतोष जताया है। उसका कहना है कि शिकायत में बताए गए घटनाक्रम के अनुरूप उचित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता पक्ष पुलिस अधीक्षक से मिलकर मामले में निष्पक्ष जांच और विधि के अनुसार उचित कार्रवाई की मांग कर सकता है। कानूनी रूप से किसी मामले में कौन-सी धाराएं लागू होंगी, इसका निर्धारण घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और लागू कानून के आधार पर किया जाता है। इसलिए प्राथमिकी में दर्ज धाराओं की उपयुक्तता पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले मुकदमे के अभिलेखों और जांच के तथ्यों का परीक्षण जरूरी है।

निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर

यह मामला अब केवल दो पक्षों के बीच हुए विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। शिकायतकर्ता के आरोप, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो, समझौते के कथित प्रयास और कार्रवाई में देरी से जुड़े सवालों ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कैसे करती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है। किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है। साथ ही, शिकायतकर्ता को भी कानून के अनुरूप निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई पाने का अधिकार है।

फिलहाल प्रमुख सवाल यही हैं कि शिकायत पर कार्रवाई में देरी के कारण क्या थे, समझौते के दबाव के आरोपों में कितनी सच्चाई है और जांच के आधार पर किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई उचित होगी? इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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