विधायक आशु मलिक ने सदन में खोली नगर निगम की पोल

विधायक आशु मलिक ने सदन में खोली नगर निगम की पोल
450 करोड़ का बजट, पर 32 गांवों का विकास फिर भी ठप !
संवाददाता – मो कलीम अंसारी
सहारनपुर आशु मलिक ने विधानसभा सत्र के दौरान सहारनपुर नगर निगम के विस्तारित क्षेत्र में शामिल 32 गांवों में विकास कार्य न होने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार द्वारा घोषित 450 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विधायक आशु मलिक ने कहा कि नगर निगम के गठन के समय 32 गांवों और आउटर कॉलोनियों को इसमें शामिल किया गया था, लेकिन आज तक वहां एक ईंट तक नहीं लगी। उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के दानिश कॉलोनी, गुलदस्ता कॉलोनी, रमजानपुर, गणपति कॉलोनी, कैलाश विहार, नवादा रोड, काजीपुरा, काजूवाला, सड़क दूधली समेत कई गांवों का नाम लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सड़क, नाली और जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। बरसात के दिनों में अधिकांश सड़कों पर कीचड़ की स्थिति बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि विभागीय मंत्री के सहारनपुर दौरे के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया था और इसे प्राथमिकता में शामिल करने की बात कही गई थी, बावजूद इसके आज तक विकास कार्य शुरू नहीं हो सके। स्थिति यह है कि न तो ग्राम पंचायत इन गांवों में कार्य कर पा रही है और न ही नगर निगम द्वारा कोई ठोस कदम उठाया गया है।
विधायक आशु मलिक ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि नगर निगम में शामिल किए गए गांवों में शीघ्र विकास कार्य शुरू कराए जाएं। उन्होंने कहा कि नगर विकास मंत्री ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कार्य कराने का आश्वासन दिया है और लगभग तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की बात कही है।
इसके साथ ही विधायक ने गांव पिंजोरा में दलित समाज के लिए शमशान घाट/अंत्येष्टि स्थल की वर्षों पुरानी मांग भी सदन में उठाई। उन्होंने इसे केवल सुविधा का नहीं बल्कि सम्मान और समान अधिकार का विषय बताया। मंत्री द्वारा इस संबंध में जल्द कार्यवाही का आश्वासन दिए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
विधायक ने क्षेत्र की जनता को विश्वास दिलाया कि जब तक 32 गांवों में सड़क, नाली और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती और पिंजोरा में दलित समाज को सम्मानजनक शमशान घाट नहीं मिल जाता, तब तक यह मुद्दा सदन के अंदर और बाहर उठता रहेगा। उन्होंने कहा, यह लड़ाई केवल विकास की नहीं, बल्कि सम्मान की भी है।



